बागेश्वर खनन पर हाईकोर्ट सख्त: जांच के बाद ही मिलेगी अनुमति, वैध संचालकों को राहत के संकेत

Published: 21 Mar 2026, 07:55 AM   |   Updated: 21 Mar 2026, 08:05 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में खड़िया खनन को लेकर चल रहे विवाद में अब न्यायालय ने संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि खनन की अनुमति अब केवल उन्हीं संचालकों को मिलेगी, जो नियमों पर खरे उतरेंगे।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया कि किसी भी खनन ऑपरेटर को अनुमति देने से पहले उसके सभी दावों का गहन सत्यापन किया जाए। इसके लिए जिला खान अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो हर मामले की व्यक्तिगत जांच करेंगी।

यह मामला तब शुरू हुआ था जब बागेश्वर के ग्रामीणों की शिकायतों पर न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया। 6 जनवरी 2025 को सभी खनन कार्यों पर रोक लगा दी गई और 9 जनवरी को मशीनों को जब्त करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद कई खनन संचालकों ने अदालत में अपील कर कहा कि वे सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और उनके पास वैध अनुमति है।

सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध से राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है। इसी आधार पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही 29 वैध सोपस्टोन खनन पट्टा धारकों को काम फिर से शुरू करने की अनुमति दे चुका है।

उच्च न्यायालय ने भी इस तथ्य को स्वीकार करते हुए संकेत दिए कि जिन खनन संचालकों के पास वैध दस्तावेज हैं और जिन पर कोई गंभीर उल्लंघन नहीं है, उन्हें राहत दी जा सकती है। लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि बिना जांच कोई छूट नहीं मिलेगी।

पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर भी न्यायालय सख्त नजर आया। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर एक क्षेत्रीय अधिकारी नियुक्त करे, जो जिला खान अधिकारी के साथ मिलकर जांच करेगा।

खनन संचालकों को दो सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिसके बाद अधिकारियों द्वारा उनकी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाएगी।

सुनवाई के दौरान स्टोन क्रशर संचालकों ने भी अपनी परेशानी रखी, जिस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल सोपस्टोन खनन से जुड़ा है और स्टोन क्रशरों पर लागू नहीं होता।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी, जहां जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

यह फैसला न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि नियमों का पालन करने वाले लोगों के साथ न्याय हो।

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