Published:
28 Mar 2026, 03:23 PM
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Updated:
28 Mar 2026, 03:25 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
देहरादून के सर्वे चौक स्थित ऑडिटोरियम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन और Indian Institute of Public Administration के तत्वावधान में “भारत: विश्व गुरु की राह पर” विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने की, जबकि संचालन दून पुस्तकालय के निदेशक एन. रविशंकर ने किया। इस अवसर पर Smarter than the Storm के लेखक अमिताभ कांत की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में अमिताभ कांत ने भारत की उभरती वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले एक दशक में देश ने तकनीक, कनेक्टिविटी, नीतिगत सुधार, कार्य संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने डेमोग्राफिक डिविडेंड को अवसर में बदलने, स्किल और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के अंतर को पाटने तथा गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना के विकास पर बल दिया। साथ ही “Zero Defect, Zero Effect” को उत्पादन संस्कृति में अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैश्विक वैल्यू चेन में बेहतर स्थान हासिल करने के लिए निरंतर नवाचार की बात कही।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के पूर्व निदेशक शिशिर प्रियदर्शी ने संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘विश्व गुरु’ बनने के दावे से अधिक उस दिशा में निरंतर प्रयास और आत्ममंथन जरूरी है। उन्होंने भारत की प्राचीन विरासत को प्रेरणा बताते हुए गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सकारात्मक सोच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की ग्रीन इकोनॉमी, विशिष्ट आतिथ्य, युवाओं की भागीदारी और जनचेतना भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जनभागीदारी के बिना विकास अधूरा है” और पर्यटन, हेल्थ एवं वेलनेस तथा पर्यावरण संतुलन को राज्य के विकास का आधार बताया।
भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य सचिव राजीव खेर ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक क्षमता पर जोर देते हुए गुणवत्ता-आधारित प्रतिस्पर्धा को आवश्यक बताया। वहीं पूर्व शहरी विकास सचिव शंकर अग्रवाल ने शहरों को आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने, तकनीक आधारित शहरी प्रबंधन और स्मार्ट अर्बन प्लानिंग की जरूरत पर बल दिया।
वक्ताओं ने सामूहिक रूप से यह भी स्पष्ट किया कि ‘विश्व गुरु’ एक लक्ष्य है, जिसके लिए भारत को निरंतर सुधार, नवाचार, गुणवत्ता और जनभागीदारी के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और आम नागरिक उपस्थित रहे।
