दुधवा के पास तेंदुए का आतंक खत्म: वन विभाग ने ट्रैंक्युलाइज कर किया काबू, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

Published: 18 Mar 2026, 07:22 AM   |   Updated: 18 Mar 2026, 07:30 AM
Category: उत्तराखंड   |   By: Admin

दुधवा नेशनल पार्क से सटे इलाके में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के शिकंजे में आ गया।

तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पंचायत बनवीरपुर में इस तेंदुए का ऐसा खौफ था कि लोग घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे थे। हर आहट पर दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं और शाम होते ही गांव में सन्नाटा छा जाता था।

सोमवार को स्थिति तब और भयावह हो गई, जब तेंदुआ गांव निवासी हेमचंद वर्मा के घर में घुस गया। इस दौरान उसने बब्बू पर हमला कर उसे घायल कर दिया। कुछ ही देर बाद तेंदुए ने रामप्यारी पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के चेहरों पर डर साफ नजर आने लगा।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, बेलरायां वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने पहले पूरे इलाके को घेरकर सुरक्षा घेरा तैयार किया, ताकि कोई ग्रामीण तेंदुए के संपर्क में न आए।

इसके बाद शुरू हुआ एक बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन। विशेषज्ञों ने सही समय का इंतजार किया और जैसे ही मौका मिला, तेंदुए को बेहोशी का इंजेक्शन (ट्रैंक्युलाइज़र) लगाया गया। कुछ ही देर में तेंदुआ अचेत हो गया और टीम ने राहत की सांस ली।

बेहोश तेंदुए को सावधानीपूर्वक स्ट्रेचर पर लादकर पिंजरे में कैद किया गया और बेलरायां वन रेंज कार्यालय लाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार तेंदुए की हालत सामान्य है और जांच के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा।

कई दिनों से डर के साए में जी रहे बनवीरपुर के लोगों ने अब राहत की सांस ली है। गांव में एक बार फिर सामान्य जीवन लौटने की उम्मीद जगी है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि जंगल से सटे क्षेत्रों में सतर्कता बरतें और किसी भी जंगली जानवर की सूचना तुरंत दें, ताकि समय रहते ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर इशारा करती है, जहां सतर्कता और समझदारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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