Published:
19 Mar 2026, 06:16 AM
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Updated:
19 Mar 2026, 06:17 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
उत्तराखंड के हल्द्वानी में नव संवत्सर 2083 के पावन अवसर पर हिन्दू नव वर्ष आयोजन समिति द्वारा 108 कुंडीय महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में श्रद्धा, संस्कृति और सामूहिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट और जिला संघचालक डॉ. नीलाम्बर भट्ट सहित कई गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।
इस महायज्ञ में अष्टादशभुजा महालक्ष्मी मंदिर से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वर यति जी महाराज, हनुमान धाम के संस्थापक आचार्य विजय जी तथा क्षेत्र सेवा प्रमुख धनीराम जी का सानिध्य प्राप्त हुआ।
यज्ञ का संचालन यज्ञब्रह्मा डॉ. विनय विद्यालंकर द्वारा कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की ब्रह्मचारिणियों के साथ वैदिक विधि से सम्पन्न कराया गया। आचार्य विजय जी ने नव संवत्सर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति में सत्य, श्रद्धा और निष्कपटता के मूल्यों को समझाया।
महामंडलेश्वर स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में यज्ञ के आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का माध्यम है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्वयंसेवक और विभिन्न संस्थानों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और आयोजकों द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने का प्रेरणादायक प्रयास भी साबित हुआ।
