Published:
21 Mar 2026, 06:21 AM
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Updated:
21 Mar 2026, 06:23 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
उत्तराखंड के पहाड़ एक बार फिर प्रकृति के तेवर झेल रहे हैं। लगातार हुई बारिश और बर्फबारी के बाद अब पहाड़ दरकने लगे हैं, जिससे लोगों की जिंदगी थम सी गई है। बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक मार्ग कई जगहों पर बंद हो चुके हैं, और यात्रा पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।
चमोली जिले के ऊंचाई वाले गांव—पाणा, ईराणी, झींझी, सुतोल, कनोल, रामणी और पडेरगांव—में बारिश के साथ बर्फबारी तो हुई, लेकिन बर्फ जल्दी पिघलने लगी। इसके बावजूद ठंड ने अपना असर दिखाया और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। बदरीनाथ धाम में तापमान माइनस चार डिग्री तक पहुंच गया, जिससे हालात और भी कठिन हो गए।
बारिश के बाद ज्योतिर्मठ क्षेत्र में पहाड़ों के दरकने की घटनाएं सामने आई हैं। गोविंद घाट के पास पिनोला में बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से बदरीनाथ हाईवे पूरी तरह बंद हो गया है। वहीं नीति-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी सालधर के पास भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है।
गंगोत्री हाईवे को खोलने के लिए बीआरओ लगातार प्रयास कर रहा है, जबकि यमुनोत्री हाईवे जंगलचट्टी में बंद पड़ा है। सड़कों के बंद होने से आम लोगों के साथ-साथ यात्रियों और मजदूरों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बर्फबारी का असर बदरीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के कार्यों पर भी पड़ा है। करीब 100 से अधिक मजदूर और इंजीनियर वहां मौजूद थे, लेकिन खराब मौसम और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश दिए गए। हालांकि, रास्ता बंद होने के कारण कई मजदूरों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।
धाम में दो फीट तक ताजा बर्फ जम चुकी है, जबकि हेमकुंड साहिब में तीन फीट तक बर्फबारी दर्ज की गई है। नीती और माणा घाटी के गांव भी बर्फ की चादर में लिपटे हुए हैं। यह दृश्य जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो रहा है।
प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बीआरओ को जल्द से जल्द मार्ग खोलने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जब तक मौसम पूरी तरह से साफ नहीं होता, तब तक राहत की उम्मीद कम ही नजर आती है।
यह प्राकृतिक सुंदरता का वही पहाड़ है, जो कभी सुकून देता है, तो कभी जीवन की कठिन सच्चाई भी दिखा देता है।
