Published:
30 Mar 2026, 08:47 AM
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Updated:
30 Mar 2026, 08:48 AM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और अहम बदलाव लागू होने जा रहा है। 1 जुलाई से राज्य में मदरसा बोर्ड को भंग किया जाएगा, जिसके बाद सभी मदरसों को नई नियमावली के तहत संचालित होना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है।
नई व्यवस्था के अनुसार, अब किसी भी मदरसे को संचालित करने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक प्राधिकरण की धारा 14 के अंतर्गत तय 11 सख्त शर्तों को पूरा करना होगा। ये शर्तें पारदर्शिता, गुणवत्ता और सामाजिक संतुलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई हैं।
मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी छात्र या शिक्षक को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। शिक्षकों की नियुक्ति केवल मान्यता प्राप्त डिग्रीधारकों में से होगी और संस्थान का संचालन अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जाएगा। साथ ही, राज्य शिक्षा परिषद से संबद्धता, सोसायटी रजिस्ट्रार में पंजीकरण और जमीन का संस्थान के नाम पर होना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा, सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के बैंक खाते से किए जाएंगे और सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से ही होंगे। प्राधिकरण और परिषद के निर्देशों का पालन करना, सांप्रदायिक एवं सामाजिक सद्भाव बनाए रखना, तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करना, खेल मैदान और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता भी जरूरी होगी।
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून काश्मी के अनुसार, अब मदरसों में पढ़ाई पूरी तरह राज्य शिक्षा बोर्ड के सिलेबस के अनुसार कराई जाएगी। दिन में 6 से 7 पीरियड सामान्य विषयों के होंगे, जबकि धार्मिक शिक्षा स्कूल समय के बाद अलग सत्र “पार्ट-2” में दी जाएगी।
इस नई व्यवस्था से उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे छात्रों को बेहतर भविष्य के अवसर मिल सकेंगे।
