Published:
21 Mar 2026, 12:22 PM
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Updated:
21 Mar 2026, 12:23 PM
Category:
उत्तराखंड
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By: Admin
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस फैसले पर सवालों की बौछार कर दी है और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूरे चार साल तक अधूरे मंत्रिमंडल के साथ काम किया, तब शासन-प्रशासन पर कोई असर नहीं बताया गया। ऐसे में कार्यकाल के अंतिम चरण में अचानक मंत्रिमंडल विस्तार करना कई संदेह पैदा करता है।
यशपाल आर्य ने तंज कसते हुए कहा कि 2022 में पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद सरकार ने लंबे समय तक तीन मंत्री पद खाली रखे। उस समय न तो विकास कार्यों में कमी की बात सामने आई और न ही प्रशासनिक जरूरत बताई गई। अब जब सरकार का कार्यकाल अंतिम दौर में है, तो नए मंत्रियों की नियुक्ति का औचित्य समझ से परे है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जनहित में नहीं, बल्कि भाजपा के अंदर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी को संभालने के लिए उठाया गया है। उनके अनुसार, यह राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश ज्यादा नजर आती है।
वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पहले ही करीब 99 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसे में नए मंत्रियों की नियुक्ति से बढ़ने वाला खर्च सीधे जनता पर अतिरिक्त भार डालेगा और वित्तीय अनुशासन पर भी सवाल खड़े करेगा।
उन्होंने जनता से जुड़े कई सवाल भी उठाए—क्या यह विस्तार केवल राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए किया गया है? क्या सरकार अपने ही नेताओं की नाराजगी दूर करने के लिए जनता के पैसों का इस्तेमाल कर रही है? और क्या ऐसे फैसले वास्तव में प्रदेश के विकास में कोई ठोस योगदान देंगे?
अंत में यशपाल आर्य ने कहा कि अब प्रदेश की जनता इस राजनीति को समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उठे ये सवाल आने वाले चुनावी माहौल में सियासी बहस को और तेज करने वाले हैं।
