Published:
14 Oct 2026, 01:28 PM
Category:
राज्य
|
By: Jokhim News
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी तैयारी तेज करते हुए प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। इन प्रभारियों को संगठन के कामकाज और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हालांकि, इन नियुक्तियों में सरकार के कुछ दायित्वधारियों (जिन्हें मंत्री का दर्जा प्राप्त है) के शामिल होने से अब सियासी सवाल उठने लगे हैं। कुल 18 ऐसे नाम हैं जिन्हें राज्य सरकार ने दायित्वधारी मंत्री का दर्जा दिया है और अब उन्हें पार्टी संगठन ने भी विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारी दी है।
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि सरकार से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं लेने वाले ये नेता सरकारी और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे। कांग्रेस ने इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए दायित्वधारियों को उनके पदों से हटाने की मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि जब इन नेताओं को सरकारी खजाने से सुविधाएं मिल रही हैं, तो उनकी संगठनात्मक और चुनावी गतिविधियों को लेकर जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।
फिलहाल, भाजपा की इन नियुक्तियों ने सरकार और संगठन की जिम्मेदारियों के बीच के अंतर और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
